बरसात में क्या खाएं? क्या नहीं खायें ? और क्यों ऐसा करें?
हमारे देश में मुख्य रूप से तीन मौसम हैं। हर मौसम का तापमान अलग होता है। गर्मी के मौसम में धूप बहुत ज्यादा रहती है। सबकुछ सूखा सूखा रहता है और तापमान बढ़ जाता है। बरसात में धूप बिल्कुल नहीं रहती और तापमान सामान्य रहता है जबकि धूप निकलने के बावजूद सर्दी में बरसात से भी तापमान बहुत कम हो जाता है। सालो भर मौसम बदलता रहता है। इसीलिए प्रकृति भी उसी के अनुकूल चलती है इसी का नतीजा है की अलग-अलग मौसम में अलग-अलग प्रकार के फल फूल और सब्जियां मिलती है।
प्रकृति मौसम के हिसाब से बदल जाती है लेकिन मनुष्य नहीं बदलता । वह सालों भर एक ही प्रकार से खानपान, वस्त्र और दिनचर्या रखना चाहता है। इसी का नतीजा होता है कि मौसम बदलने के साथ मनुष्य की तबीयत बदल जाती है और वह हर मौसम में बीमार हो जाता है। यदि हम प्रकृति के साथ चलेंगे तो निश्चित रूप से मौसम बदलते ही हमारी तबीयत नहीं बिगड़ेगी और हम स्वस्थ रहेंगे।
आइए, मैं आपको बताता हूं कि बरसात में हमें क्या खाना पीना चाहिए और कैसे रहना चाहिए।आषाढ़ महीना के साथ ही बरसात शुरू हो जाती है। आषाढ़ महीना जून-जुलाई में आता है। इस समय धूप बहुत कम निकलती है या नहीं निकलती है और बरसात होती रहती है। मौसम सूखा नहीं रहता है। गर्मी कम पड़ती है। इसीलिए इस महीने में बेल बिलकुल नहीं खाना चाहिए। हरी सब्जी के बजाय जमीन के अंदर होने वाली सब्जियां और दूसरी तरह की सब्जियां खानी चाहिए। इस महीने में खेलना कूदना या कसरत करना बहुत जरूरी है। तभी मौसम बदलने के साथ आपकी तबीयत खराब नहीं होगी।
सावन महीना जुलाई और अगस्त में आता है। इस महीने में साग नहीं खाना चाहिए। दूध और दूध से बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। हरे (हरिद्र या हरडा) जरूर खाना चाहिए। नींबू नहीं खाना चाहिए। मकई आग में पकाया हुआ जरूर खाना चाहिए।
भादो महीना जो जुलाई और अगस्त में आता है, इस महीने में धूप लगभग नहीं निकलती है और तापमान पहले की अपेक्षा ज्यादा गिर जाता है। मौसम में आए अचानक इस परिवर्तन के कारण हमें भी अपने शरीर को उसके अनुकूल बनाना पड़ता है। इसीलिए इस महीने में दही और छाछ जैसी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। तिल खूब खाना चाहिए। तीखा खाना चाहिए।
आश्विन महीना जो सितंबर और अक्टूबर में आता है, इस महीने में बारिश कम होती है। धूप निकलती है लेकिन धूप में गर्मी पहले जैसी नहीं रहती है, तापमान पहले से और गिर जाता है। इसीलिए इस मौसम में करेला नहीं खाना चाहिए और गुड़ अवश्य खाना चाहिए।
इसके अलावा एक सामान्य सी बात है। हर मौसम में मिलने वाली विशेष सब्जियां और फल अवश्य रुप से खानी चाहिए। भौगोलिक कारण से अलग-अलग जगह अलग-अलग प्रकार की स्थानीय सब्जियां और फल मिलते हैं। यदि आप वहां के स्थानीय व्यक्ति नहीं हैं तब भी उन चीजों का अवश्य सेवन कीजिए। यदि हम मौसम में मिलने वाली सब्जियां और फल खाएंगे तो उस मौसम में जो बीमारी होती है वह बिल्कुल नहीं होगी। धन्यवाद! स्वस्थ रहें और मस्त रहें !
