शरीर के किस हिस्से में बसती
है चिंता
हमारे हाथ के हथेली में चिंता निवास करती है।अब मैं आपको इसका उदाहरण या कहें प्रमाण दे रहा हूँ। जब हम चिंतित होते हैं तो हमारी हथेली से पसीना आने लगता है। हम बार बार हाथ मलते हैं। अगर दोनों हाथ ऊपर करके हम बैठे तो हमारी ये चिंता धीरे धीरे गायब हो जाती है। यानि आप चिंता से परेशां हैं और उससे राहत पाना चाहते हैं तो थोड़ी देर दोनों हाथ ऊपर करके लेट जाइये।आप चिंता मुक्त हो जायेंगे। अगर आपने अपने दोनों हाथों को सोते समय सीने से लगा लिया है तो रात भर आप किसी बात को लेकर चिंता में चले जाते हैं और हो सकता है उस रात आपको कोई बुरा सपना भी आ जाए। यदि आप अपने दोनों हाथों को सोते समय अपने शरीर के साथ सीधा लिटा देते हैं दो चिंता आपके साथ रहेगी मगर सोई रहेगी आपको परेशान नहीं करेगी। यदि आप दोनों हथेली को जेब में रखे हुए हैं तो इसका मतलब है कि आप अपनी चिंता किसी को दिखाना और बताना नहीं चाहते हैं। यदि आप दोनों हथेली अपनी कमर के पीछे रखे हैं तो इसका मतलब है चिंता आपका पीछा कर रही है, आप इस चिंता से कैसे मुक्त हो इसी में लगे हुए हैं। यदि आपने अपने दोनों हथेलियों को सीने से लगाकर हाथ जोड़कर खड़े या बैठे हैं तो इसका मतलब है कि आप खामखा अपनी चिंता को अपने दिल से लगा रखे हैं। या कोई ऐसी बात चिंता का रूप ले ली है जो दिमाग से ज्यादा आपके दिल को परेशान कर रही है। यदि आप सो कर उठते हैं और अपने दोनों हथेली को रगड़ कर उन हथेलियों से आप अपना चेहरा पोछते हैं तो इसका मतलब है कि आपने अपनी कल तक की सारी चिंताओं से हाथ धो लिया। मतलब जो गुजरा हुआ कल है, उसकी आपको कोई चिंता नहीं है। आप चिंता मुक्त हैं और आज नया दिन शुरू हो रहा है। यदि आप अपने दोनों हथेली को कसकर बांध लेते हैं तो आपकी चिंता कितनी भी ताकतवर क्यों न हो वह अपना दम तोड़ देती है। मतलब आपने अपनी चिंता को गला दबाकर मार दिया। हम इंसान हैं। पारिवारिक और व्यवहारिक जीवन में यदा-कदा ना चाहते हुए भी आदमी चिंता करने लगता है। किसी बात को लेकर वह चिंतित हो ही जाता है। फिर भी मैं यही सलाह दूंगा कि चिंता करने के बजाए चिंतन कीजिए।